नवर सिंग के कार्यों में हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक विश्लेषण

Author: Sweta Kumari

DOI Link ::    https://doi-ds.org/doilink/07.2024-53142579/BIJMRD/Vol -2 / 5/2024/A4

Abstract:नामवरसिंहनेअपनाआलोचकीयजीवन ‘हिंदीकेविकासमेंअपभ्रंशकायोगदान’ सेआरंभकियाथा।इसमेंअपभ्रंशसाहित्यपरविचारकरतेहुएबीच-बीचमेंनामवरजीनेटिप्पणियाँदीहैं, वेविचारपूर्णएवंसुचिंतितहैं।वेसूक्ष्मदर्शिताऔरसहृदयताकेसाथमार्क्सवादीआलोचनापद्धतिकारूपप्रस्तुतकरतीहैं।नामवरसिंहनेहिन्दीआलोचनामेंजबसे (57-58 वर्षपहले) कदमरखाहैतभीसेवेइसकेकेन्द्रीयकिरदाररहेहैं।इसदौरानसाहित्यकारोंकीपीढीबदलगई।हिन्दी- साहित्यमेंकईआन्दोलनआएऔरगए।आलोचकवरचनाकारआएऔरगए. लेकिनइसमायनेमेंनामवरसिंहएकअपवादहीहैंकिइतनेलम्बेसमयबादभीनतोआए-गयोंकीसूचीमेंशामिलहुएऔरनहीपुरानेपड़े।एकतोहिन्दी- लोचनाकीयहविडम्बनाहीरहीहैकिआमतौरपरइसकेमहत्त्वपूर्णआलोचकभीविशेषसमयकेबादकेसाहित्यकेभावबोधकोसही-सहीनहींपहचानपाएऔरनयेलेखनकोपुरानेविचारोंवसाहित्यिकमानदण्डोंकेआधारपरपीटतेरहेऔरखारिजकरतेरहे।दूसरीगौरकरनेकीबातहैकिहिन्दीकेसमर्थआलोचकमूलतःकविथे, कविताकेक्षेत्रसेवेआलोचना-कर्ममेंप्रवृत्तहुएइसलिएउनकीआलोचना-दृष्टिवआलोचना-कर्मपरकविताहीछाईरही।आलोचनामेंकवितासेइतरगद्यकीविधाओंकीउसतरहविवेचनानहींहुईजिसकीवेअधिकारीथी।किसीप्रसंगवश, मजबूरीवश, जरूरतवशयालिहाजवशयदिकिसीगद्यविधाकाजिक्रहुआभीतोकेवलउपन्यासकाही।जबकहानीजैसीमहत्त्वपूर्णविधाभीउपेक्षितरहीतोआत्मकथा, जीवनीआदिकातोजिक्रहीक्याकरना।यद्यपिनामवरसिंहभीकवितासेशुरूकरकेआलोचना-कर्ममेंदाखिलहुए, लेकिनवेसिर्फकविताकीआलोचनातकहीनहींरूकेऔरकहानीआलोचनाकोभीनयाफलकप्रदानकिया।

Keywords:

Page No : 115-124

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