उच्च विद्यालयों के छात्रों के लिए एक विषय के रूप में हिंदी शिक्षा में बहु-बुद्धि सिद्धांत की भूमिका और शैक्षणिक सफलता पर इसका प्रभाव

Author: प्रतिभा कुमारी & डॉ शमा चक्रवर्ती

DOI Link: https://doi.org/10.70798/Bijmrd/04080013

Abstract: प्रत्येक व्यक्ति में अव्दितीय बुद्धिमत्ता होती है जो उनकी संज्ञानात्मक क्षमताओं को प्रभावित करती है,जैसे तर्क,समस्या समाधान और भाषा समझ |बुद्धि –लब्धि के पारम्परिक उपाय अक्सर एकल मानक पर ध्यान केन्द्रित करतें हैं,लेकिन हार्वर्ड गार्डनर के बहु बुद्धि-लब्धि सिद्धांत १९८३ ने भाषाई,तार्किक-गणितीय और स्थानिक सहित कई प्रकार की बुद्धि-लब्धि की पहचान करके इस दृष्टिकोण को चुनौती दी |

शिक्षक तेजी से छात्र-केन्द्रित शिक्षण दृष्टिकोण अपना रहें हैं जो इन विविध बुद्धिमताओं को अपनाता है|विभेदित शिक्षाशास्त्र,जो छात्रों की पसंदीदा सीखने की शैलियों के साथ शिक्षण विधियों को संरेखित करता है,बच्चों का पढाई के साथ जुड़ाव और अकादमी के प्रदर्शन को बढ़ा सकता है |जबकि इस सिद्धांत की कठोर परीक्षण की कमी और कुछ बुद्धिमता को प्राथमिकता देने की प्रवृति के लिए आलोचना की गई है,यह सक्रिय शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए मूल्यवान ढांचा बना हुआ है |

यह अध्ययन हाई स्कूल के छात्रों के बीच प्रमुख बुद्धिमता और हिंदी में शैक्षणिक उपलब्धि के साथ उनके सहसंबंध का पता लगाने के लिए विस्तृत अध्ययन है ,जिसमे विभिन्न स्कूलों के कक्षा दसवीं और बारहवीं के बच्चों कि जाँच की जाती है,यह शोध एक अंतर्दृष्टि प्रदान करती है कि कैसे एकाधिक बुधिमत्ता को लागू करने से भाषा सीखने में शैक्षणिक परिणामों में सुधार होता है |ताकि बच्चे अपने भविष्य में हिंदी विषय को लेकर भी आगे बढ़े |

Keywords: शिक्षक, हिंदी विषय, हाई स्कूल, अध्ययन, सक्रिय शिक्षण, राजभाषा|

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